यम द्वितीया, भाई दूज, चित्रगुप्त पूजा* के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

सभी परिजनों को 
*यम द्वितीया, भाई दूज, चित्रगुप्त पूजा* के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह पर्व भारतीय संस्कृति के दोनों प्रमुख त्योहारों दीपावली ओर होली के साथ जोड़ा गया है ताकि हर्षोल्लास के बाद कर्म में सुचिता का स्मरण रखा जा सके।
    यह दिन समस्त सांसारिक गतिविधियों में लिप्त मानव को शरीर के अलावा अपनी आत्मा के उत्कर्ष के लिए कुछ प्रयत्न करते रहने की प्रेरणा के लिए ऋषियों ने रखा है। 
  पर्व पूजन के साथ मृत्यु के देवता यम, कर्मों का लेखा जोखा रखने बाले चित्रगुप्त भगवान की पूजा कर मृत्यु के बाद के जीवन का स्मरण किया जाता है। 
 रिस्ते -नातों में एक ही रिस्ता है भाई-बहन का जिसमें सारा संसार समस्या है, भारतियों का प्रमुख संवोधन भी भाईयो - बहिनों ही है। 
तीसरा पूजन आज के दिन अपने व्यवसाय में प्रयुक्त होने वाले प्रधान साधन जैसे कलम - दवात, तराजू,औजार ,मशीन, आदि का किया जाता है ,और स्मरण करते हैं कि जो भी काम करगें संसार की सेवा मानकर पूरी ईमानदारी से करेंगे, ताकि मृत्यु का डर हमें कभी भी सता नहीं सके।जीवन रूपी चदरिया यहां वेदाग छोड़कर जाएंगे। 
   पर्व के संदेश हम सभी के जीवन के अंग बने, हम   शरीर नहीं आत्मा हैं, भगवान के युवराज हैं, महाराज द्वारा सौपें संसार को स्वर्ग बनायेंगे, जिस स्थिति में हमें मिला था उससे बेहतर बनायेंगे, यही संकल्प लेकर  पर्व के आनंद के बाद अपने कर्म में जुट जाएं। 
  युगाधिपति भगवान महाकाल प. पू. गुरूदेव हमारे आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करें यही प्रार्थना और मंगल कामना है